परम्परागत तरीके के साथ मनाया गया करवा चौथ का पर्व
महिलाओं ने घरों में सुनी करवा चौथ की कहानी
बागपत। विपुल जैन
सुहागिनों का पर्व यानि करवा चौथ जिले भर में पारम्परिक रीति-रिवाजों के अनुसार मनाया गया। इस मौके पर महिलाओं ने निर्जल व्रत रखा और अपने सुहाग की लम्बी आयु के लिए कामना की।
गंगा मैया में जब तक की पानी रहे, मेरे संजना तेरी जिन्दगानी रहे, जी हां, यह गीत अक्सर करवा चौथ की याद दिला देता है। बुधवार को करवा चौथ का पर्व था। सुबह से ही महिलाएं इस पर्व को मनाने की तैयारी में जुट गई थी। उन्होंने दोपहर के समय घरों में करवे को रोली-चावल से तिलक कर पूजा-अर्चना की और उसके बाद करवा चौथ की कहानी सुनाई। कहानी के बाद उन्होंने अपने सास-ससुर के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया और उन्हें बायना दिया। उन्होंने निर्जल व्रत रखा और भगवान से अपने पति की दीर्घायु होने की कामना की। काफी महिलाओं ने एक-दूसरे के घर भी जाकर करवा चौथ की कहानी सुनी। दिनभर करवा चौथ की कहानी सुनने के लिए एक-दूसरे के घर महिलाओं का आना-जान लगा रहा। शाम को चांद का दीदार होने पर महिलाओं ने जल चढ़ाया और उसके बाद व्रत खोला। दिन छिपते ही महिलाएं चांद को देखने के लिए अपने मकानों की छतों पर चढ़ गई थी।

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