पहले की होली में और आज की होली में आ गया काफी अंतर
मिलन का त्यौहार बनता जा रहा है लड़ाई-झगड़ों का त्यौहार
बागपत। विपुल जैन
होली भारत का प्राचीन पर्व है। यह फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। लोग एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाते है और ढोल बजाकर होली के गीत गाते है, लेकिन वर्तमान में नशे के चलन ने रंगों के इस त्यौहार को बदरंग कर दिया है।
रालोद वरिष्ठ नेता एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य सतीश चोधरी का कहना है कि होली एक ऐसा त्यौहार है, जिसमें लोग पुरानी कटूता को भूलकर इस दिन फिर से गले मिलकर दोस्त बन जाते है, लेकिन वर्तमान समय में इस त्यौहार के मायने उल्टे होते जा रहे हैं। मिलन का यह त्यौहार लड़ाई-झगड़ों का त्यौहार बनता जा रहा है। उनके समय की होली में तथा आज की होली में काफी फर्क आ गया है। पहले होली पर जो मेहमान घर पर आते थे, उनकी आवभगत ठंडाई से की जाती थी, लेकिन आज इस त्यौहार पर शराब परौसी जाने लगी है। पहले लोग चंदन, गुलाब जल व टेसू के फूलों से होली खेलते थे, लेकिन आज रासायनिक रंगों का इस्तेमाल किया जाने लगा है, जो त्वचा के लिए काफी घातक है। उन्होंने सभी से पुराने गिले-शिकवे भूलाकर प्रेम के साथ होली का त्यौहार मनाने की बात कही।
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