बागपत। विपुल जैन
रालोद नेता एवं छपरौली के पूर्व विधायक डॉ अजय तोमर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा की गयी आर्थिक पैकेज की घोषणा में संशोधन की मांग उठाई है।
उन्होंने कहा कि आज जो देश में हालात हैं, वह बहुत चिंताजनक है। हमारे प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय आपदा के समय एक बहुत बड़े आर्थिक पैकेज की घोषणा की तथा इस घोषणा के साथ इसको देश की जीडीपी से तुलनात्मक रूप से पेश किया। लेकिन किसको क्या मिला, क्या मिलेगा यह किसी की समझ में नहीं आ रहा है। अगर व्यापारी बैंक से लोन ले रहा है या किसान क्रेडिट कार्ड के रूप में बैंक से लोन ले रहा है तो सरकार द्वारा आर्थिक सहायता इसमें कहां है।
किसी प्रकार की कोई आर्थिक सहायता इसमें नहीं है। कहा कि किसान अपनी फसल नहीं भेज पा रहा है। फूल का, फल का, सब्जी का और यहां तक गन्ने का किसान आज बेबस है। छोटा दुकानदार परेशानी का जीवन जी रहा है। इस आर्थिक पैकेज में ना किसान का सोचा गया है और ना ही दुकानदार व्यापारी का सोचा गया है। उन्होंने केंद्र सरकार से आर्थिक पैकेज में संशोधन करते हुए सीधे किसानों, दुकानदारों, व्यापारियों,मजदूरों, युवाओं व बुजुर्ग बेसहारा महिलाएं और पुरुषों के लिए दस हजार रुपये प्रतिमाह इस राष्ट्रीय आपदा के समय देने के प्रावधान की मांग उठाई है।
रालोद नेता एवं छपरौली के पूर्व विधायक डॉ अजय तोमर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा की गयी आर्थिक पैकेज की घोषणा में संशोधन की मांग उठाई है।
उन्होंने कहा कि आज जो देश में हालात हैं, वह बहुत चिंताजनक है। हमारे प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय आपदा के समय एक बहुत बड़े आर्थिक पैकेज की घोषणा की तथा इस घोषणा के साथ इसको देश की जीडीपी से तुलनात्मक रूप से पेश किया। लेकिन किसको क्या मिला, क्या मिलेगा यह किसी की समझ में नहीं आ रहा है। अगर व्यापारी बैंक से लोन ले रहा है या किसान क्रेडिट कार्ड के रूप में बैंक से लोन ले रहा है तो सरकार द्वारा आर्थिक सहायता इसमें कहां है।
किसी प्रकार की कोई आर्थिक सहायता इसमें नहीं है। कहा कि किसान अपनी फसल नहीं भेज पा रहा है। फूल का, फल का, सब्जी का और यहां तक गन्ने का किसान आज बेबस है। छोटा दुकानदार परेशानी का जीवन जी रहा है। इस आर्थिक पैकेज में ना किसान का सोचा गया है और ना ही दुकानदार व्यापारी का सोचा गया है। उन्होंने केंद्र सरकार से आर्थिक पैकेज में संशोधन करते हुए सीधे किसानों, दुकानदारों, व्यापारियों,मजदूरों, युवाओं व बुजुर्ग बेसहारा महिलाएं और पुरुषों के लिए दस हजार रुपये प्रतिमाह इस राष्ट्रीय आपदा के समय देने के प्रावधान की मांग उठाई है।
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