बागपत। विपुल जैन
कोविड-19 की वैश्विक महामारी के दौरान जहा बालको को भी विभिन्न प्रकार से परेशानी का सामना करना पड रहा है, वही स्कूल संचालकों द्वारा जबरन फीस वसूली के कृत्य से समस्या बढती ही जा रही है।
न्यायपीठ सीडब्ल्यूसी ने शासन व बाल संरक्षण आयोग के नियमों के अनुरूप ही फीस वसूली करने हेतु दिशा-निर्देश जनपद के शिक्षा अधिकारियों को देते हुए कहा कि यदि विधि विरुद्ध बालको से फीस वसूली होती है, तो किशोर न्याय अधिनियम के अंतर्गत कारवाई की जा सकती है। कोरोना महामारी की मार से बालक भी अछूता नही है, छात्र -छात्राओं की पढाई भी प्रभावित हो रही है। मार्च के बाद से ही लाॅक-डाऊन के चलते बालकों की संस्थागत पढ़ाई रूक गई है।जनपद के स्कूल -कालेज सभी बन्द है। कुछ बालकों -बालिकाओं की परीक्षा भी नही हो पाई है।हालांकि कुछ स्कूल-कॉलेज आन-लाईन पढाई कराने का दावा भी कर रहे है, वही शिक्षण संस्थान संचालकों द्वारा बिना पढ़ाई के ही छात्रों के परिजनों पर फीस वसूली का दबाव बनाया जा रहा है। जबकि शासन तथा एनसीपीसीआर यानि राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने भी दिशा-निर्देश जारी किए हुए है, फिर भी स्कूल संचालक की हठधर्मिता जारी है। स्कूल संचालकों द्वारा बालको व परिजनों पर लगातार फीस वसूली को लेकर दबाव बनाया जा रहा है, अन्यथा की स्थिति मे नाम विच्छेद करने की धमकी भी दी जा रही है। न्यायपीठ सीडब्ल्यूसी बागपत मे भी ऐसी शिकायते पहुंचने पर सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष राजीव यादव, न्यायिक सदस्य डा कुलदीप कुमार व मालती शर्मा ने किशोर न्याय(देखरेख व संरक्षण) अधिनियम 2015 की धारा 29 (2) में प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जनपद बागपत के शिक्षा अधिकारी, डीआईओएस तथा बीएसए को निर्देशित किया है कि शासन की मंशा के अनुरूप, नियमानुसार बालको को आनलाईन शैक्षणिक गतिविधियों को जारी रखा जाये। साथ ही बालको को मानसिक रूप से प्रताड़ित न किया जाए। शासन तथा राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के निर्देशो का पालन किया जाये। यदि फिर भी शिक्षण संस्थान नही मानते है, तो यह कृत्य अधिनियम की धारा 75,77 के तहत बालको को मानसिक प्रताड़ना की श्रेणी मे विधि विरुद्ध कृत्य होगा। न्यायपीठ सीडब्ल्यूसी ने दोनो शिक्षा अधिकारियों को जनपद के समस्त स्कूल-कालेज को सूचित कर इस विधि विरुद्ध बाल उत्पीड़न को रोकने के लिए निर्देशित किया है ।
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