राजन पहलवान जैसी सोच पैदा करे सभी लोग : उज्जवल । NMPK Media @Baghpat

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बागपत। विपुल जैन 
उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री डॉ कुलदीप उज्जवल ने कहा कि
अन्नदाता का दिल बहुत बड़ा होता है। वह ईश्वर का दूसरा रूप होता है। वह अपनी आँखों के सामने कभी किसी को भूखा और प्यासा नहीं देख सकता, भले ही उसके लिए अन्नदाता को अपनी जान की ही बाजी क्यों न लगानी पड़े। 
इस बात को सिद्ध करने वाली एक सत्य घटना प्रस्तुत है। जब बड़े-बड़े धन्ना सेठों और पूंजीपतियों ने करोडों गरीब मजलूम प्रवासी मजदूरों को धक्का देकर निकाल दिया और उन्हें जहमत की जिंदगी जीने पर मजबूर कर दिया तो दूसरी तरफ अन्नदाताओं ने अपने खेतिहर मजदूरों को प्यार देने का काम किया है। पूरे देश में एक भी ऐसा उदाहरण नहीं है जिसमें किसान के साथी खेतिहर मजदूर सड़कों पर बदहाल हालत में मिले हों। राजन पहलवान अपना छोटा भाई है और सामाजिक व राजनीतिक जीवन में हमारे कन्धे से कंधा मिलाकर समाज सेवा में हाथ बंटाता है, बड़ी खेती है इसलिए हमेशा खेतिहर मजदूरों का साथ जरूरी है। प्रत्येक वर्ष कई लोग मिलकर देश के दूसरे हिस्सों से ससम्मान खेतिहर मजदूरों को लेकर आते हैं और काम की समाप्ति पर वापस छोड़ते हैं। इस बार परिस्थितियां विषम थी, तमाम मजदूर दहशत में थे, पैदल ही निकल जाना चाहते थे, लेकिन अन्नदाताओं नें उन्हें ऐसा नहीं करने दिया। घर में ही मेहमान की तरह रखा। लगातार उनके परिवारों से वार्तालाप कराई, लेकिन उनको मौत के मुँह में नहीं कूदने दिया। हमारे पास 28 प्रवासी मजदूर थे जो आसपास के गाँवों में ही रोजगार पाए हुए थे। सबको प्राइवेट बस से भेजने का कार्यक्रम तय कर लिया। हमने बस की परमिशन भी ले ली, लेकिन एक अधिकारी मित्र ने कहा कि एक सप्ताह ओर रोक लो, मध्यप्रदेश सरकार से सरकारी बसों की परमिशन मिलने वाली है। वह अनुमति कल मिल पाई है। आज जब राजन पहलवान स्वम् उन तमाम प्रवासी खेतिहर मजदूरों को मेरठ रोडवेज बस स्टैंड पर बैठाने आए तो एक-एक मजदूर की आँखें नम थी, हर एक व्यक्ति का गला रूंदा हुआ था और यह कह रहा था कि हे ईश्वर किसान और मजदूर की जोड़ी को सलामत रखना। इसलिए देश के तमाम किसानों और मजदूरों से अपील है कि अपने अस्तित्व की रक्षा करनी है तो जाति, धर्म, क्षेत्र और भाषा की दीवारों को लाँघकर इस कृष्ण सुदामा जैसी दोस्ती को मजबूत करने का काम करो और भाई राजन पहलवान जैसी सोच पैदा करो। औद्योगिक जगत को इस घटना से सबक लेने की आवश्यकता है, चूँकि मजदूर के बिना एक भी मशीन का पहिया घूमने वाला नहीं है।

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