सही पोषण न मिलने के कारण बेटियों को आन्तरिक स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से जूझना पड़ता है ।भविष्य में यही समस्याएँ भंयकर एवं विकराल बीमारियों के रूप में आती है । अज्ञानता और संकोच के कारण बेटियाँ बोल नहीं पाती हैं ।कुपोषण से भी बेटियों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है ।जिससे पी . सी . ओ . डी. , थायरॉयड, गठिया ,एंजाइटी, ओलिवोमेनोरिया आदि बीमारियाँ हो जाती हैं ।कार्यक्रम अधिकारी डा गीता रानी ने कहा कि स्वस्थ बेटियाँ ही स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण कर सकती हैं ।
सही पोषण से शारीरिक स्वास्थ्य के साथ साथ मानसिक स्वास्थ्य भी मज़बूत होता है । शारीरिक श्रम के साथ पानी भी भरपूर मात्रा में पियें ।संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए डा अलका रानी ने कहा कि शुद्ध-ताजा भोजन ,दूध आदि का प्रयोग करें और फ़ास्ट फ़ूड का सेवन न करें ।कार्यक्रम में डा नीलम राणा,डा पूनम मलिक ,रचना आदि का विशेष योगदान रहा ।पलकी शर्मा , पूजा, तनु,ईशा,आँचल, मीनू,सलोनी त्यागी आदि ने प्रतिभाग किया ।

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