बागपत। विपुल जैन
अतिशय क्षेत्र सरूरपुर कला के श्री 1008 प्राचीन अतिशयकारी नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में सोमवार को जैन धर्म के आठवें तीर्थंकर श्री चंद्रप्रभु भगवान का मोक्षकल्याणक महोत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया।
इस दौरान श्रद्धालुओं ने 72 अर्घ्यो से भगवान चन्द्रप्रभु की पूजा अर्चना की और लड्डू चढ़ाया। इस मौके पर नमन जैन ने कहा कि दुख में सब सुमिरन करें ,सुख में करे न कोय सुख में जो सुमिरन करे, तो दुख काहे का होय। अर्थात हम सभी भगवान को दुख में याद करते हैं, लेकिन अपने शुभ कार्यों में हम भगवान को अधिकतर भूल जाते हैं। इसीलिए हमारे द्वारे पर प्रतिदिन कोई ना कोई विपत्ति आकर खड़ी हो जाती है। इसलिए हम सभी भगवान को जितना दुख में याद करते हैं, उतना ही सुख में भी याद करना चाहिए। उनकी बड़े ही मनोयोग के साथ प्रतिदिन पूजन करनी चाहिए। बताया कि जैन धर्म के 24 तीर्थंकर हुए है और सभी तीर्थंकर का जन्म शाश्वत भूमि अयोध्या में हुआ है और मोक्ष सम्मेद शिखर से होता है। परंतु हुंडावसर्पणी काल के प्रभाव के कारण कुछ तीर्थंकरों के जन्म अन्य स्थान पर हुए और मोक्ष भी अन्य स्थान से हुआ। इसी प्रकार चंद्रप्रभु भगवान का जन्म चंद्रपुरी में हुआ और मोक्ष कल्याणक श्री सम्मेद शिखर के ललित कूट से हुआ। हम सबका सौभाग्य है कि आज चंद्रप्रभु भगवान के मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर हम सभी ने श्री चंद्रप्रभु महामंडल विधान किया और आज ही से फाल्गुन माह की अष्टाहनिका पर्व प्रारंभ प्रारंभ हो रहे हैं। इसलिए सभी को आगामी 8 दिनों तक जिनेंद्र प्रभु की महा अर्चना बड़े ही भक्ति भाव के साथ करनी चाहिए। इस मौके पर गीता, संतोष, मंजू, कमलेश, शालू, लक्ष्मी ,उषा, वासु, हिमांशु ,लक्ष्य, अभय,
तनु, दीपांशी, साक्षी, आशी आदि मौजूद थे।
अतिशय क्षेत्र सरूरपुर कला के श्री 1008 प्राचीन अतिशयकारी नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में सोमवार को जैन धर्म के आठवें तीर्थंकर श्री चंद्रप्रभु भगवान का मोक्षकल्याणक महोत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया।
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| बागपत के सरूरपुर कलां गांव में श्री चंद्रप्रभु भगवान के मोक्ष कल्याणक महोत्सव के मौके पर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु |
तनु, दीपांशी, साक्षी, आशी आदि मौजूद थे।

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