बागपत। विपुल जैन
साहित्याचार्य पंडित नीरज शास्त्री ने कहा कि 2 मार्च से होलाष्टक शुरू हो चुके हैं और यह होलाष्टक आगामी 9 मार्च की रात को 11 बजकर 17 मिनट तक रहेंगे। होलाष्टक में कोई भी शुभ कार्य करना निषेध माना जाता है, अर्थात इन दिनों कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते।
पंडित नीरज शास्त्री मंगलवार को नगर में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। बताया कि होलाष्टक में न तो शादी विवाह किए जा सकते और ना ही दुकान के मुहूर्त व गृह प्रवेश किये जा सकते। इन दिनों पूजा-पाठ व दान-पुण्य का भी विशेष महत्व होता है। व्यक्ति अपनी श्रद्धा के अनुसार दान पुण्य कर सकता है। हिंदी पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से पूर्णिमा तक होलाष्टक रहता है। यह ग्रह शांति के लिए काफी उपयुक्त समय माना जाता है। बताया कि आगामी 9 मार्च को होली तथा 10 मार्च को दुल्हेंडी का पर्व पारंपरिक श्रद्धा व उल्लास के साथ धूमधाम से मनाया जाएगा। इसे रंग वाली होली वह फाग के नाम से भी जाना जाता है। बताया कि 9 मार्च की शाम को होली के दिन साढ़े बजे से रात को नो बजे के बीच होली दहन का उपयुक्त समय है। होलिका दहन समिति के कार्यकर्ता इस शुभ समय में होलिका दहन कर सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने सभी से होली के दिन अपने पूरे पुराने गिले-शिकवे भुलाकर सभी से एक होने की बात कही।
साहित्याचार्य पंडित नीरज शास्त्री ने कहा कि 2 मार्च से होलाष्टक शुरू हो चुके हैं और यह होलाष्टक आगामी 9 मार्च की रात को 11 बजकर 17 मिनट तक रहेंगे। होलाष्टक में कोई भी शुभ कार्य करना निषेध माना जाता है, अर्थात इन दिनों कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते।
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| साहित्याचार्य पंडित नीरज शास्त्री |
पंडित नीरज शास्त्री मंगलवार को नगर में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। बताया कि होलाष्टक में न तो शादी विवाह किए जा सकते और ना ही दुकान के मुहूर्त व गृह प्रवेश किये जा सकते। इन दिनों पूजा-पाठ व दान-पुण्य का भी विशेष महत्व होता है। व्यक्ति अपनी श्रद्धा के अनुसार दान पुण्य कर सकता है। हिंदी पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से पूर्णिमा तक होलाष्टक रहता है। यह ग्रह शांति के लिए काफी उपयुक्त समय माना जाता है। बताया कि आगामी 9 मार्च को होली तथा 10 मार्च को दुल्हेंडी का पर्व पारंपरिक श्रद्धा व उल्लास के साथ धूमधाम से मनाया जाएगा। इसे रंग वाली होली वह फाग के नाम से भी जाना जाता है। बताया कि 9 मार्च की शाम को होली के दिन साढ़े बजे से रात को नो बजे के बीच होली दहन का उपयुक्त समय है। होलिका दहन समिति के कार्यकर्ता इस शुभ समय में होलिका दहन कर सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने सभी से होली के दिन अपने पूरे पुराने गिले-शिकवे भुलाकर सभी से एक होने की बात कही।


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