डॉ कुलदीप उज्जवल पूर्व मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार एवं राजनीतिक विश्लेषक
-------------------------------
बागपत। देश में कुव्यवस्था के कारण अव्यवस्था अपना नंगा नाच कर रही है। कोरोना नामक भयंकर महामारी से बचने के लिए जब सचेत होना चाहिए था, तब हम पूंजीवाद की चाशनी में लिपटकर अमेरिका के मूर्ख राजा की खिदमत कर रहे थे। अंतरराष्ट्रीय दरवाजों से जब यह महामारी हमारे घर में घुस रही थी तो हम ट्रम्प के स्वागत की खुमारी में मस्त पड़े थे। हमने 15 लाख संदिग्धों को बिना किसी जाँच के घर में घुसा लिया और फिर हम बिना किसी तैयारी के बौखलाहट में लॉक डाउन का निर्णय लेते हैं। परिणाम यह हुआ कि मरकज ने जमकर कोरोना का प्रसाद बांटा। देश के तमाम मैट्रोसिटीज की सीमाओं पर लाखों लोग जमा हो गए, वह सब अपने घर जाना चाहते थे। यातायात के साधनों के अभाव में वह पैदल ही चल पड़े, चूँकि उनके सामने अनिश्चितताओं के बादल छाए हुए थे। किसी भी सरकार के पास कोई जवाब नहीं था। यह उन्ही सरकारों की बात है जो अब 40 दिन बाद ऐसे लोगों को घर पहुंचाने की बात कर रही है, जबकि यह लोग तभी से सड़कों पर चल रहे हैं अथवा काफी अपने गंतव्य स्थान तक पहुँच भी गए हैं। तमिलनाडु एक मेले में हजारों लोग जुट जाते हैं, लेकिन सरकारों को पता ही नहीं चल पाता है। रेलवे की बुद्धिहीनता लॉक डाउन के चलते मुंबई और सूरत के रेलवे स्टेशनों पर हजारों लोगों को जमा कर देती है, लेकिन किसी की कोई जवाबदेही नहीं होती है। आज फिर कुव्यवस्था के ठेकेदारों ने अव्यवस्था को निमंत्रण देकर शराब की दुकानें खोली हैं। हजारों लोग सड़कों पर खुले घूम रहे हैं। शराब की दुकानों पर भयंकर भीड़ है। करोड़ों लोग जो बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं वह भी इस भीड़ का हिस्सा हैं। उनके घर की औरतें इस दहशत में हैं कि शाम को बच्चे क्या खायेंगें। घरेलू हिंसा की भी नींव मजबूत हो रही है। निम्न मध्यम और निम्न वर्ग आर्थिक रूप से इस मार को झेलने की स्थिति में नहीं है। उच्च मध्यम वर्ग भी ज्यादा दिन इस मार को नहीं झेल पायेगा। ऊपर से यह भीड़ कोरोना कैरियर्स के रूप में अपना पूरा काम करेगी, लगभग सारे कृत्यों की तस्वीरें साझा हैं। भगवान ही मालिक है, बाकी बर्बाद होने में कोई चूक नहीं है।
Subhashis,lekhan a yeh prayas satat chalte rahna chahiye.
जवाब देंहटाएं