प्रवासी मजदूरों के साथ हो रहे व्यवहार पर संज्ञान को लेकर पत्र भेजा। NMPK Media @Baghpat

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राष्ट्रीय प्रजापति महासंघ ने आज श्री मान चेयरमैन महोदय, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भारत सरकार से प्रवासी मजदूरों के साथ हो रहे व्यवहार /अधिकार समाप्ति और घर लौटते समय हुई मृत्यु आदि पर संग्यान लेने हेतु मेल द्वारा पत्र भेजकर मांग की है।

 पत्र में कहा गया है कि मानवाधिकार आयोग मानवीय संवेदनाओं व मानव पर किसी प्रकार के अत्याचार को संग्यान में लेकर उन्हें राहत देने हेतु गठित है। किन्तु देश में जो प्रवासी मजदूरों के साथ इस समय घटित है वह दृश्य मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली घटनाएँ हैं जिनकी जानकारी आदमी तक है। संभव है आप भी अपरिचित न होंगे।

महोदय, कोरोना महामारी को बङे लोगों द्वारा विदेश से लाकर फैलाया गया है जिसका खामियाजा देश की जनता और करोड़ों मजदूर भोगने को मजबूर हैं।

कहा कि, जब समस्त कल- कारखाने बन्द होने से मजदूरों की रोजी छिन गई भूखों मरने की कगार पर पहुंचने लगे, तब ये लोग अपने घरों की ओर चलने को मजबूर हुए। लगभग डेढ़ माह तक सरकार द्वारा मजदूर वापसी का कोई साधन उपलब्ध नहीं कराया गया। सङकों पर आवागमन पूर्णतः बन्द था। जिस कारण उन्हें सपरिवार पैदल जाने की मजबूरी रही।

श्रीमान जी, ऐसे में सैकड़ों किमी की पैदल यात्रा करना दुष्कर और चुनौती पूर्ण कार्य है। किन्तु दुर्भाग्य यह रहा कि सङक पर पुलिस द्वारा रोक लगाने से सङक छोङ अन्य रास्तों से निकलना सही मान कर चलते रहे और विभिन्न घटनाओं के शिकार हो मृत्यु को प्राप्त हो गये।

  दूसरी ओर राज्य सरकारों द्वारा ऐसे संकट के समय में श्रम कानून संशोधन बिल पास कर उनके अधिकारों का हनन करते हुए समाप्त कर दिया। जो अन्याय पूर्ण व औचित्य हीन प्रतीत होता है। जिससे उनके परिवारों की दुर्दशा होना निश्चित है।
  महोदय, सरकार द्वारा मृतक के परिवार को मात्र 2 - 2 लाख सहायता राशि की घोषणा कर पल्ला झाड़ लिया।
   ऐसे में राष्ट्रीय प्रजापति महासंघ आपसे सानुरोध मांग करता है कि मानवीय संवेदनाओं के आधार पर व विशेष अधिकार के अन्तर्गत आप राष्ट्र निर्माण के सहयोगी प्रवासी मजदूरों के हालात का संग्यान लेते हुए उन्हें निम्न सुविधाएं प्रदान करने हेतु निर्देश निर्गत कर लाभान्वित कर सकें।
1-श्रमिक कानून संशोधन बिल वापस कराते हुए उनके अधिकारों में बढ़ोतरी की जाए।
2-सरकार द्वारा मृतक के परिवार हेतु घोषित धनराशि ऊंट के मुंह में जीरा है। कम से कम 8से 10 लाख रुपये का मुआवजा राशि प्रति मृतक के परिवार को दिलायी जाय ताकि पीड़ित परिवार के बच्चों का लालन-पालन और शिक्षा - दीक्षा तथा परिवार द्वारा कोई देय ऋण (यदि कोई हो) का भुगतान किया जा सके।
3-मृतक मजदूरों के घटकों पर न्यायिक जांच कर कार्यवाही सुनिश्चित कराई जाए।
4-यदि किसी भी मृतक पर किसी प्रकार का सरकारी ऋण अवशेष है तो तत्काल प्रभाव से माफ कराया जाय।
   महोदय, राष्ट्रीय प्रजापति महासंघ आशा करता है कि आपके संग्यान से मजदूर वर्ग लाभान्वित होगा।

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