गांव की जीवन शैली सर्वोत्तम : राजेंद्र सिंह । NMPK Media @Baghpat

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बागपत। विपुल जैन 
एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कोरोना महामारी का पर्यावरण संपदा पर प्रभाव नामक शीर्षक पर नेशनल वेबिनार का आयोजन किया गया, इसमें बागपत जनपद समेत कई जनपदों व प्रदेशों के लोगों ने प्रतिभाग किया। 
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय कुलपति प्रोफेसर अनिल शुक्ला ने की तथा मुख्य अतिथि रमन मैग्सेसे अवार्डी जल पुरुष राजेंद्र सिंह डोला (बागपत) रहे। राजेंद्र सिंह ने कहा कि हमारा देश पर्यावरण रक्षा से ही विश्व गुरु बना और भूमंडल पर सभी जीव जंतुओं की रक्षा व सेवा की है। हमारी प्राचीन की जीवन शैली लाभ से अधिक शुभ चिंतन वाली थी जो आज केवल लाभ केंद्रित होती जा रही है। इसके लिए हम प्राकृतिक संपदा को नष्ट करते जा रहे है।|उन्होंने गांव की माटी, गांव का पानी, गांव में बने गोबर की खाद का जिक्र करते हुए गांव की जीवन शैली को सर्वोत्तम बताया।  उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना ग्रामीण स्तर पर जैव विविधता संबंधी आंकड़े जुटाने कार्य करने का प्रयास करें।
जल पुरुष ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा पोषण पाठ्यक्रम संचालित करने किया जा सकता है, जिससे हर गांव को रिसोर्स मैपिंग से संपन्न बनाने की कोशिश की जाएगी।उन्होंने बताया कि हमें  देशी पद्धति को पुनः अस्तित्व में लाना है और ग्राम स्वराज की स्थापना करनी है। कुलपति प्रोफेसर अनिल शुक्ल ने जल पुरुष राजेंद्र सिंह जी के व्यक्तित्व और कृतित्व की सराहना करते हुए कहा कि युवाओं को उनके व्यक्तित्व का अनुकरण करना चाहिए। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी एक प्राकृतिक संकेत के रूप में हमें सावधान कर रही है कि  समय रहते हम अपनी जीवनशैली में इस प्रकार परिवर्तन करें, जिससे पुनः हमारा पर्यावरण स्वच्छ हो सके। उन्होंने बताया कि आज लॉक डाउन के कारण प्रदूषित शहरों में प्रदूषण का स्तर 50 प्रतिशत से भी अधिक कम हो गया है। देश की नदियां स्वच्छ हो चुकी है। हमें आसमान नीला वह बरेली से हिमालय की चोटियां  दिखाई देने लगी। हम प्रकृति से  पुनः  जुड़े, ग्राम पंचायतें विश्वविद्यालय के साथ मिलकर प्राकृतिक उन्नयन स्थापित करें, जिससे नेचर ओर नर्चर में संतुलन स्थापित हो। क्षेत्रीय निदेशक  अशोक श्रोती ने अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि के द्वारा दिए गए  सुझाव के अनुपालन का निर्देश राष्ट्रीय सेवा योजना के सभी कार्यक्रम अधिकारियों को मुख्य अतिथि की जीवन शैली को आत्मसात करने की बात कही तथा पोषण पाठ्यक्रम राष्ट्रीय सेवा योजना में रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराएगा। डॉ  अंशुमाली शर्मा, राज्य संपर्क अधिकारी ने अपने उद्बोधन में जल पुरुष राजेंद्र सिंह के जीवन दर्शन का साक्षात्कार कराया। उन्होंने बताया कि भ्रमण के माध्यम से हम सभी को जल पुरुष की कर्म स्थली को देखना चाहिए और उनकी जीवनशैली को अपने जीवन में शामिल करना चाहिए। उन्होंने बताया कि जल संरक्षण का कार्यक्रम चलाते हुए आधी बाल्टी पानी से कई वर्षों तक स्नान करना, पशु पक्षियों से प्रेम व्यवहार करना, प्रकृति का सम्मान करना आज उनकी जीवन शैली का प्रमुख अंग रहा। उन्होंने अपने व्यक्तित्व के साथ-साथ अपने कार्यों से भी समाज को प्रभावित किया है। हमें प्रकृति से  उसकी प्रसन्न मुद्रा में ही अमृत की प्राप्ति हो सकती है। डॉ रामवीर सिंह चौहान राष्ट्रीय सेवा योजना ने इस वेबिनार के लिए सभी को बधाई दी। कहा कि यह वेबिनार अन्य विश्वविद्यालयों के लिए एक अवसर प्रदान करेगा। अंत में डॉ सोमपाल सिंह ने सभी अतिथियों, कार्यक्रम अधिकारीयों और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया। डॉ सिंह ने कुलपति  व मुख्य अतिथि सहित सभी के परामर्श को राष्ट्रीय सेवा योजना की जीवन शैली में शामिल करने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ सोमपाल सिंह कार्यक्रम संयोजक एवं श्रमिक राष्ट्रीय सेवा योजना महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय बरेली ने किया। 
इस अवसर पर सभी नोडल अधिकारी डॉ शबाना, डॉ राकेश जयसवाल, नरेंद्र बत्रा, डॉ रामकुमार, डॉ विमल शर्मा, डॉ प्रीति पांडे, डॉ पीयूष कुमार, डॉ रीता सिंह, डा धनंजय सिंह आदि  ने अपने विचार रखे।

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