# वर्षा के जल का करें अधिक से अधिक संचय: हरेन्द्र
#भू-जल के गिरते स्तर को ना रोका गया तो भुगतने होंगे गंभीर परिणाम
बागपत। विपुल जैन
युवा समाज सेवी हरेन्द्र प्रधान बली ने कहा कि भू-जल मीठे पानी के सोत्र के रूप में एक प्राकृतिक संसाधन है, जिसको कुओं और नलकूपों के द्वारा निकालकर उपयोग किया जाता है, लेकिन आज इस जल का अंधाधुंध दोहन होने के कारण भू-जल का स्तर लगातार गिरता जा रहा है, जो बड़ा ही चिंता का विषय है।
हरेन्द्र प्रधान बली ने बताया कि पृथ्वी की सतह पर जो जल पड़ा होता है, वह भूमि के गुरुत्वाकर्षण से खींच कर भू-जल का निर्माण करता है। भू-जल के स्तर को बढ़ाने के लिये यह आवश्यक है कि वर्षा का जल अधिक से अधिक समय तक भूमि की सतह पर रहे, इसके लिये हमारे पूर्वजों ने तालाबों का निर्माण करवाया था, लेकिन वर्तमान समय में मौजूद तालाबों की संख्या लगातार घट रही है और नये तालाबों का निर्माण नही हो पा रहा है। जिसकी वजह से वर्षा ऋतु का जल भूमि की सतह पर अधिक समय तक नहीं रूक पाता और नालों और नदियों से होता हुआ समुद्र में मिल जाता है। अगर हम लोग तालाब बनाकर इस पानी को भूमि की सतह पर रोक पाये तो यह रिसकर भूमि में जायेगा और भू-जल का स्तर बढ़ेगा। धीरे-धीरे पूरे देश से पानी की समस्या समाप्त हो जायेगी। बताया कि पानी को भूमि से मानव उपयोग के लिये निकाला जाता है। भू-जल का सिंचाई में तेजी से दोहन के कारण इनमें अभूतपूर्व कमी दर्ज की गई है। उन्होंने भारत में तालाबों की कमी और गिरते भू-जल के स्तर पर चिंता जाहिर की है।
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