देवोत्थान एकादशी 25 को मनाई जाएगी : शास्त्री | NMPK Media @Baghpat

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बागपत। विपुल जैन
साहित्याचार्य पंडित नीरज शास्त्री ने बताया कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवोत्थान एकादशी मनाई जाती है।
कहा जाता है कि आषाढ़ शुक्ल एकादशी को दर्शन हो जाते हैं और फिर चातुर्मास के समापन पर कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन देवोत्थान एकादशी का उत्सव मनाया जाता है। इस एकादशी को ही देवउठनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस दिन विष्णु जी को जगाने का आव्हान किया जाता है। इस दिन सुबह उठकर साफ कपड़े पहने जाते हैं और फिर विष्णु जी के व्रत का संकल्प लिया जाता है। घर के आंगन में विष्णु जी के चरणों का आकार बनाया जाता है, लेकिन अगर आंगन में धूप हो तो चरणों को ढक दिया जाता है। देवोत्थान एकादशी का शुभ मुहूर्त 25 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 42 मिनट से शुरू होगा और उसके बाद 26 नवंबर को शाम 5 बजकर 10 मिनट पर समाप्त होगा। बताया कि इस दिन अंसुज साया भी होता है। अगर किसी की शादी नहीं सूझ रही है तो वह व्यक्ति देवोत्थान एकादशी को विवाह कर सकता है।

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