बागपत। विपुल जैन
जिलेभर में रविवार को अहोई का पर्व परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार मनाया गया। इस दौरान माताओं ने व्रत रखा और अपने बच्चों की दीर्घायु होने की कामना की।
माताओं ने एक-दूसरे के घरों में जाकर अहोई की कथा सुनी और रात को तारे देखने के बाद व्रत खोला। अहोई को लेकर बाजार में कलेंडर, करवे तथा व्रत के सामान आये हुए थे, जिन्हें खरीदने के लिए दुकानों पर महिलाओं की भीड़ उमड़ रही थी। साहित्याचार्य पंडित नीरज शास्त्री ने बताया कि यह पर्व दीपावली के आरम्भ होने की सूचना देता है। यह पर्व विशेष तौर पर माताओं द्वारा अपनी संतान की लम्बी आयु के लिए किया जाता है। जिन जातकों की संतान को शारीरिक कष्ट हो, स्वास्थ्य ठीक न रहता हो, बार-बार बीमार पड़ते हो या किसी भी कारण माता-पिता को अपनी संतान की ओर से स्वास्थ्य व आयु की दृष्टि से चिंता बनी रहती हो, इस पर्व पर संतान की माता द्वारा समुचित व्रत व पूजा आदि का विशेष लाभ प्राप्त होता है। संतान स्वस्थ होकर दीर्घायु को प्राप्त करती है। जिन दम्पतियों के पुत्र नहीं बल्कि पुत्री संतान है, वह भी अहोई माता की पूजा करती है। संतान की कामना वाली महिलाओ द्वारा भी यह व्रत रखकर अहोई माता से संतान प्राप्ति की प्रार्थना की जाती है, लेकिन यह भी नियम है कि एक साल व्रत लेने के बाद आजीवन यह व्रत टूटना नहीं चाहिए। बताया कि धारणा है कि सिर्फ सपूतों के लिए ही व्रत रखा जाता है, ऐसा नहीं है। आज के बदलते दौर में जब पुत्री भी माता-पिता के लिए बराबर की मान्यता साकार करती है तो पुत्रियों की लम्बी आयु के लिए भी व्रत रखा जा सकता है। अग्रवाल मण्डी टटीरी में माताओं ने अहोई की कहानी सुनी ओर सूर्य देवता को जल चढ़ाया। इस मौके पर उर्मिला, सुनिता, सुमन, प्रेना, राकेश देवी, सपना, सरिता, आशा, अनिता आदि उपस्थित रही।

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