बागपत। विपुल जैन
साहित्याचार्य पंडित नीरज शास्त्री ने बताया कि हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है।
5 दिनों तक चलने वाला यह उत्सव धनतेरस से शुरू होकर भैया दूज पर खत्म होता है। सुख सौभाग्य की कामना से इस दिन धन, वैभव, ऐश्वर्य की देवी मां लक्ष्मी और रिद्धि-सिद्धि के दाता श्री गणेश जी का पूजन अन्य देवी-देवताओं सहित किया जाता है। घर या कार्यस्थल पर धन की देवी मां लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहे और पूजा-पाठ का पूर्ण लाभ मिल सके, इसके लिए आवश्यक है कि श्रद्धा भक्ति के साथ हम सब दीपावली पूजन सच्चे मन से करते रहें। दीपावली के दिन पूजा के लिए पहला शुभ मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 6 मिनट से शाम को 3 बजकर 33 मिनट तक है। यह लगन विशेषकर व्यापारियों के लिए है। इस लग्न में व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों में गणेश लक्ष्मी की पूजा अर्चना कर सकते हैं। उनकी मूर्ति की स्थापना कर सकते हैं। दीप प्रज्वलन लग्न को प्रदोष लग्न कहते हैं। दिवाली के दिन शाम को 5 बजकर 35 मिनट से 7 बजकर 25 मिनट तक यह शुभ मुहूर्त है। यह स्थिर लग्न होता है और इसमे अपने घर में गणेश-लक्ष्मी की पूजा अर्चना कर सकते हैं। उनकी मूर्ति की स्थापना कर सकते हैं। रात्रि पूजा लग्न साधकों के लिए होता है, जिसमे मंत्र सिद्ध करते हैं, जॉब करते हैं। इस लग्न में पूजा अर्चना की विशेष महत्वता होती है। दिवाली के दिन रात्रि 11 बजकर 43 मिनट से रात को 1 बजकर 59 मिनट तक यह है। यह मुहूर्त शुभ रहेगा। लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त शाम को 5 बजकर 30 मिनट से शाम को 7 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। इसकी अवधि 1 घंटा 55 मिनट है, जो पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा।

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