बागपत की डाॅली जाटव नारी शक्ति की अनुपम मिसाल | NMPK Media @Baghpat

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बागपत। विपुल जैन 
बागपत की डाॅली जाटव छोटी सी उम्र में ही वो उपलब्धियाॅं हासिल कर चुकी है, जिसको हासिल करने के लिये लोग अपनी पूरी जिंदगी लगा देते है। वर्ष 2008 में जन्मी डाॅली जाटव की गिनती आज देेश की सबसे कम उम्र की टाॅप निशानेबाज खिलाड़ियों में होती है।
डाॅली जाटव में बचपन से ही निशानेबाजी सिखने की ललक थी, लेकिन उनके पिता संजय जाटव की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी, जिसके कारण उन्होंने इस महंगे खेल से डाॅली की दूरी बनायी रखी। देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर के बेहतरीन निशानेबाज देने वाले डाॅं राजपाल सिंह ने इस छोटी सी लड़की की निशानेबाजी के प्रति जिद और जुनून को देखा तो अपनी शुटिंग रेंज के दरवाजे इस प्रतिभावान लड़की के लिये खोल दिये। डाॅली को शुटिंग के लिये आवश्यक संसाधन मुहैया कराने में डाॅं राजपाल सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। डाॅली दिल्ली सहित देश के कई राज्यों में निशानेबाजी कम्पीटिशन में हिस्सा ले चुकी है और अनेकों गोल्ड़ मेडल अपने नाम कर चुकी है। राष्ट्रीय स्तर पर भी पदक बटोरकर डाॅली अपनी प्रतिभा देश को दिखा चुकी है। देश के कई केन्द्रीय मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक इस लड़की के हौसले की तारीफ कर चुके है। बीएसएफ के महानिदेशक केके शर्मा तो डाॅली की विलक्षण प्रतिभा और कमजोर आर्थिक स्थिती को देखते हुए ट्रेनिंग के लिये पिस्टल और बुलेट तक दे चुके है। डाॅली अपनी उपलब्धि का सारा श्रेय अपने माता-पिता, बीपी सिंहल शुटिंग रेंज के संस्थापक डाॅ राजपाल सिंह और अपनी कोच नीतू स्योराण को देती है। डाॅली बताती है कि इनकी सहायता से ही आज वह इस मुकाम पर है और आने वाले समय में देश के लिये अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत सारे पदक हासिल करना चाहती है।

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